उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के सदस्य पद के लिए जिले में दूसरे चरण का मतदान पूरी तरह शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हो गया। 20 और 21 जनवरी को दो दिनों तक चले इस महत्वपूर्ण चुनाव में अधिवक्ताओं ने उत्साह, अनुशासन और लोकतांत्रिक जिम्मेदारी का परिचय देते हुए बढ़-चढ़कर अपने मताधिकार का प्रयोग किया। सभी मतदान केंद्रों पर शांतिपूर्ण माहौल बना रहा और किसी भी केंद्र से अव्यवस्था या विवाद की कोई सूचना नहीं मिली, जिससे चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता साफ तौर पर दिखाई दी।
जिले की पांच तहसीलों उरई, कोंच, जालौन, माधौगढ़ और कालपी के अधिवक्ताओं ने उरई, कोंच, कालपी और जालौन में बनाए गए मतदान केंद्रों पर मतदान किया। मतदान प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक चला। इस दौरान मतदान केंद्रों पर अधिवक्ताओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं, जो बार काउंसिल चुनाव को लेकर अधिवक्ताओं की जागरूकता और भागीदारी को दर्शाती हैं।

कुल 1373 पंजीकृत अधिवक्ता मतदाताओं में से 1212 अधिवक्ताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया, जो लगभग 88 प्रतिशत मतदान प्रतिशत रहा। यह आंकड़ा अधिवक्ताओं की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में गहरी आस्था और सक्रिय सहभागिता का प्रमाण है। उरई तहसील में सर्वाधिक मतदाता पंजीकृत थे, जहां 842 अधिवक्ताओं में से 775 ने मतदान किया। कोंच तहसील में 235 में से 214 अधिवक्ता मतदान के लिए पहुंचे। जालौन-माधौगढ़ तहसील के अधिवक्ताओं ने जालौन में बनाए गए संयुक्त मतदान केंद्र पर मतदान किया, जहां 140 मतदाताओं में से 125 अधिवक्ताओं ने वोट डाले। वहीं कालपी तहसील में 104 में से 98 अधिवक्ताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।
इस चुनाव में यूपी बार काउंसिल के सदस्य पद के लिए कुल 333 प्रत्याशी मैदान में थे, जिनकी किस्मत का फैसला अधिवक्ताओं के मतों से होना है।

दो दिनों तक चले मतदान को लेकर न्यायिक अधिकारियों, जिला प्रशासन और बार संघ पदाधिकारियों द्वारा व्यापक व्यवस्थाएं की गई थीं। मतदान केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए गए थे और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात रहा। पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए संबंधित अधिकारी भी मुस्तैद रहे।
बार काउंसिल चुनाव को लेकर अधिवक्ताओं में खासा उत्साह देखने को मिला। मतदाताओं का कहना था कि बार काउंसिल के सदस्य अधिवक्ताओं के हितों, समस्याओं और अधिकारों की सशक्त आवाज होते हैं, इसलिए सही और योग्य प्रतिनिधि का चयन बेहद जरूरी है। शांतिपूर्ण और सफल मतदान के बाद अब अधिवक्ताओं की निगाहें मतगणना और चुनाव परिणामों पर टिकी हुई हैं।



