शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने WP(C) नंबर 1155/2023 राघव चड्ढा बनाम राज्यसभा सचिवालय और अन्य के मामले में सुनवाई की। इस मामले में भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने आम आदमी पार्टी के पंजाब से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के निलंबन से संबंधित मामले में चड्ढा के बयान दर्ज किये, जिसमें अपने बयान में चड्ढा ने राज्यसभा चेयरपर्सन से बिना शर्त माफी मांगने पर सहमति व्यक्त की। पीठ ने इस पर ‘सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण’ अपनाते हुए चेयरपर्सन से इस पर कार्रवाई करने का आग्रह किया, साथ ही कहा कि चड्ढा सबसे कम उम्र के और पहली बार राज्यसभा के सदस्य बने हैं और चेयरपर्सन इस मामले में आगे बढ़ने के लिए वस्तुनिष्ठ दृष्टिकोण अपनाने पर विचार कर सकते हैं।
राघव चड्ढा से जुड़े मामले में इससे पहले हुयी सुनवाई में पीठ ने चड्ढा के अनिश्चितकालीन निलंबन पर चिंता व्यक्त की थी और टिप्पणी की थी कि आनुपातिकता के सिद्धांत को ध्यान में रखना होगा, क्योंकि विपक्षी दल की आवाज को बाहर करना गंभीर मामला है। CJI ने तब कहा था, “हमें उन आवाज़ों को संसद से बाहर न करने के बारे में बहुत सावधान रहना चाहिए।
भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने शुक्रवार को इस मामले को सुनते हुये कहा, “पिछली बार हमने कहा था कि यदि वह माफी मांग रहे हैं तो चेयरपर्सन, जो बहुत ही प्रतिष्ठित व्यक्ति और वरिष्ठ संवैधानिक पदाधिकारी हैं, शायद वह निष्पक्ष दृष्टिकोण अपना सकते हैं। इस तथ्य पर अटॉर्नी जनरल के साथ-साथ सॉलिसिटर जनरल भी इस पर सहमत हुये। इसके बाद CJI ने चड्ढा की ओर से पेश अधिवक्ता शादान फरासत से पूंछा कि क्या वह माफी मांगने को तैयार होंगे।
भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा, “श्रीमान फरासत, आप पहले ही छह बार माफी मांग चुके हैं। लेकिन क्या आप माननीय चेयरपर्सन से मिलने का समय मांगेंगे और चेयरपर्सन से मिलकर माफी मांगेंगे?” फरासत ऐसा करने के लिए सहमत हो गए और कहा, “वह अनुभवी लोगों के सदन में सबसे कम उम्र के सदस्य हैं। निस्संदेह उन्हें माफी मांगने में कोई आपत्ति नहीं है। यहां तक कि विशेषाधिकार समिति को लिखे अपने पत्र में भी मैंने चेयरपर्सन से अपनी व्यक्तिगत माफी मांगी है।”
आप राज्यसभा सांसद राघव के अधिवक्ता फरासत ने कहा कि माफी निलंबन के खिलाफ उठाए गए कानूनी विवादों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगी। तदनुसार, पीठ ने बयान दर्ज किया कि माफी मांगी जाएगी और कहा गया, “श्रीमान फरासत का कहना है कि वह राज्यसभा में सबसे कम उम्र के सदस्य हैं। यह ध्यान में रखते हुए कि जिस सदन के वह सदस्य हैं, उसकी गरिमा को प्रभावित करने का उनका कोई इरादा नहीं है,
इस पर अधिवक्ता फरासत ने कहा कि याचिकाकर्ता चेयरपर्सन से मिलने का समय मांगेंगे, जिससे वह ऐसा कर सकें। वह बिना शर्त माफ़ी मांगें जिस पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जा सके।” चड्ढा को इस आरोप में निलंबित कर दिया गया कि उन्होंने कुछ सदस्यों की इच्छा का पता नहीं लगाया, जिनके नाम जीएनसीटीडी (संशोधन) विधेयक 2023 के लिए चयन समिति के सदस्यों के रूप में उनके द्वारा प्रस्तावित किए गए थे। राज्यसभा चेयरपर्सन ने चड्ढा को सदन द्वारा पारित प्रस्ताव के बाद विशेषाधिकार समिति द्वारा जांच लंबित रहने तक निलंबित कर दिया था। यह मामला अब दिवाली अवकाश के बाद सूचीबद्ध किया गया है।



